Friday, May 31, 2013

खट्टी - मीठी लाइफ-१

मेनस्ट्रीम होने से बहुत डर लगता उसको। बाकी देखने में काफी मेनस्ट्रीम  था। गेंहुआ रंग, सामान्य कद-काठी, कोई विशेष आकर्षण नहीं। पर वो खुद को अलग मानता था। आत्मविश्वास था उसके अन्दर। दो पल बात करने से किसी को पता चल गए। पढाई में बहुत अच्छा नहीं था, ना ही खेल कूद में। पर उस आत्मविश्वास में कुछ बात थी, किसी को भी जल्दी जीत लेता था। ईशान था वो, मेरा दोस्त।

"कवि ....कवि .....कविता, कहाँ हो? "

रविश की पुकार से मैं जैसे नींद से जागी। आज सुबह से ही याद आ रही थी ईशान की।

"हाँ, मैं यहाँ बालकनी में।"

"कवि, आज रात में कंपनी की तरफ से पार्टी है। चल रही हो ना? "

"नहीं, तुम जाओं। मेरा सर भारी लग रहा है। वैसे भी तुम्हारी ऑफिस की पार्टियाँ मुझे बोर करती हैं।"

"ठीक है, जो तुम्हे ठीक लगे।"

बालों पर हाथ फेर  कर रविश चले गए। अब तो मुझे भी प्यार हो गया है रविश से। साथ रहते रहते तो पालतू जानवर से भी प्यार हो जाता है और फिर रविश तो कितने अच्छे है। जब माँ ने मेरी शादी के लिए रविश को ढूंढा था, मेरे लिए तो बस एक अरेंजमेंट था आगे की जिंदगी बिताने के लिए। पर रविश ने भी मेरा दिल जीत लिया।  जिंदगी इतनी भी बुरी नहीं होती। रविश का फोटो देख मैं मुस्कुरा उठी।

कल बर्थडे हैं ईशान  का। दोस्त था मेरा। अजीब था। फोटो खीचने का शौक था, पर खिचवाने का नहीं। बर्थडे पर गिफ्ट देने का शौक था, पर अपने जन्मदिन पर बधाइयाँ लेने का नहीं। किसी पर विस्वास नहीं करना था, पर दुसरो का विस्वास न तोड़ने का। अलग ही दुनिया थी, उसी में परेशान  रहता था, उसी में खुश रहता था।

जैसा भी था, अच्छा दोस्त था मेरा। कॉलेज में मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं होने का बीड़ा उठाया था। सब कुछ अपने ही सर लेना चाहता था। वो भी दिन थे! दुनिया की सारी  अजीब बातें मैंने उसी के साथ पहले की।

मोबाइल की  घंटी बजी। बेटे का फ़ोन था, कह रहा था की आयरलैंड के ट्रिप की फोटो मेल कर रहा हैं। फोटो अच्छी आई है।

आयरलैंड तो मैं पिछले महीने गयी थी . पर मैं और इशान तो कॉलेज में ही  सपनो में पूरी  दुनिया घूम के आ चुके थे। खयालो में ही हमने स्कॉटलैंड में अर्चेरी सीखी और न्यूजीलैंड में बंजी जंपिंग भी की।

ही वाज़ फॅमिली।

रात में दूर शहर की लाइट देखना पसंद था हम दोनों को। गुलमोहर के पेड़ के नीचे वाली बेंच पर बैठ कर हमने दुनिया भर की बातें की। जिंदगी में पैसो की अहमियत से लेकर घर, आस-पड़ोस सब की बातें की। कहानियों का पिटारा था वो। था भी तो वैसा ही, लोग बातों ही बातों में अपनी दिल में छुपायें राज़ उसके सामने खोल देते थे और वो बस हाँ- हाँ करते हुए चुप चाप उनकी बातों को सुन लिया करता था। दुनिया के सामने बड़ा शरीफ बनता था पर मेरे सामने तो जैसे वो अपने बस में ही नहीं था। कुछ भी बोलना था बस। सॉरी भी बुलवाना पड़ता था उस से।

---------------------- शेष अगले पोस्ट में











Saturday, May 4, 2013

And you will be celebrated.


Days are miserable. It will be, It should be. 

How we love? We love when we are loved. 

We learn to love when we are shown ,

how it feels to be loved, to be special. 

You can be superman,

 when you are just another common man. 

Because there are  people,

who will see great powers in you 

which you can not see. May be there is no power within you. 

But then these people have faith and trust, 

which will give you power to achieve the heights. 

i have been shown this love. 

Now when you are not around, 

i have lost my power. 

Miserable; it feels, without you. 

love me for some more days and then just go. 

Go. Go. I want to live. 

Don't fascinate me with your infinite beauty.

 I feel alone without you. 

Because i want my friends to be like you 

which obviously they can not be. 

Do not remember me, when you go. 

i will be happy. You be too.

And you will be celebrated.