Tuesday, January 20, 2015

खुश हूँ

दुखी नहीं है,
आखों में प्यार था,
शब्द नहीं है,
धन्यवाद छोटा शब्द है.

भूले नहीं है,
लबों पर हँसी थी,
दिल परेशान था,
बेचैन मन भी बेचैन था.

पल तो थामना था,
दो-चार पल और मांगने थे,
कहना था अच्छे हो,
कुछ कदम और साथ चलना था.

खुश हूँ आज कल,
देखना कभी मेरी खिलखिलाहट,
 देख भी नहीं सकते,
लगा की ना रोऊंगा फिर,

लिख रहा हूँ ये,
आसूँ ने आज धोखा दिया,
पता नहीं कैसे,
खिलखिलाहट के पीछे एक बाँध है.

कोई बात नहीं,
अंत ऐसा होता है,
सुनो एक बार फिर,
 अच्छा छोड़ो, जाओ. 
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