Monday, September 30, 2013

जाग जाओ, की ये बड़ा शहर है।

सोचा था उफान होगा,
जोश का उबाल होगा,
शहर की चमक,
और नाचना गाना होगा। 

मन में उत्साह होगा,
दौड़ने का चाह होगा,
जीतने का नशा होगा,
खुशियों का पिटारा होगा। 

नये लोग जुड़ेंगे,
रास्ता खुशनुमा होगा,
हँसते-खिलखिलाते,
गाना बजाना होगा।

नए दिन का इंतज़ार होगा,
रात का आराम होगा,
दोस्तों यारों के साथ,
महफिलों का दौड़ चलेगा।

अरे भाई, जाग जाओ,
यहाँ शोर है,
नीचा दिखाने की होड़ है,
पैसों का रौब है,
और इ एम आई की जंग है।

पडोसी अनजान है,
हर दिन जंग है,
रात में कल दिन का डर है
जाग जाओ, की ये बड़ा शहर है।

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