Friday, February 27, 2015

अँधेरी रात का चाँद

अँधेरे से भी  अँधेरी रात का चाँद  ,
डरते हुए  तारों से फुसफुसाया,
वो काले बादल मुझे  ढक लेंगे क्या ?


चाँद, ना डर तू बादल से,
बादल तो आएंगे जायेंगे,
कुछ पल तुम्हे छुपाएंगे। 

चन्दा रे, छिप जा थोड़ी देर बादल में,
लोग तुम्हे बुलाएँगे, मनाएंगे,
तेरी याद में कहानियाँ सुनाएंगे। 


बादल के झुरमुट में,
धरती के लोग तुझे ढूढेंगे,
देखते ही तुझे आई-पाइस  और धप्पा बोलेंगे।

बादल तो आएंगे जायेंगे,
धन्यवाद कर तू बादल का, क्यूंकि वो,
लोगों को तेरी याद दिलाएंगे।  

 
 image source: http://blog.thomaslaupstad.com/2008/10/18/picture-of-moon-rising-over-treetops-and-shining-clouds-in-southern-norway/


एक खूबसूरत कविता : http://universeinaglassjar.blogspot.in/2014/12/blog-post.html
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